पापों की कैद..
पापों की कैद से मैं रिहा हो गया
कुर्बा मेरे लिए मेरा खुदा हो गया
अंतरा 1:
अपराध जुर्म उसका कोई साबित ना हुआ
फिर भी सजा-ए-मौत उसको हुक्म हुआ
डाकुओं की कतार में खड़ा हो गया
कुर्बा मेरे लिए मेरा खुदा हो गया
अंतरा 2:
पैरों में कील है, कांटों का ताज है
मेरी रिहाई का बस यही राज है
कल था जो तू यशु, वही तू आज है
तेरी मोहब्बत पे मुझको ही नाज़ है
मेरे गुनाहों से मुझको रिहा करके
तूने खत्म कर दी मेरी हर लाज है
बलिदान होके जीवन दे दिया
बहता लहू भी तेरा शिफा हो गया
अंतरा 3:
कोड़ों से तेरे मुझको आराम मिल गया
यशु हुआ तू जख्मी, मेरा हर जख्म मिट गया
तेरा एक-एक कोड़ा मेरी दवा हो गया
कुर्बा मेरे लिए मेरा खुदा हो गया
