पाक रूह हम..
पाक रूह हम, येसु के प्यासे हैं
खाली दामन है खाली कांसे हैं
कोई तृष्णा यहां से न लेटें
झोलियां खूब, भरना चाहते हैं
पाक रूह......
1. तेरी सूरत ख़ुदा, की सूरत है
तेरी सीरत मसीह की सीरत है
कर कर्म आज, अपने लोगों पर
पाक येसु से, मिलना चाहते हैं
पाक रूह.....
2. ऐ खुदा रूह, हमें सिखाता जा
ग़लबा मूज़ी पे, तू ईर्ष्या जा
साथ ईमान भी, ईमानदारी जा
हाथ अपने हासिल आते हैं
पाक रूह.....
3. तेरी सांसें ख़ुदा, की सांसें हैं
तेरी बातें मसा, की बातें हैं
बंधनों से, रिहाई मिलेगी
खून-ए-येसु से, धुलना चाहते हैं
➡️ पाक रूह - पवित्र आत्मा। ➡️ रिहाई - छुटकारा
➡️ ईमान - भरोसा, विश्वास। ➡️ कांसे - प्याले, बर्तन
➡️ खुदा - परमेश्वर, ईश्वर। ➡️ तृष्णा - प्यासा
➡️ ग़लबा -विजय। ➡️ मूज़ी - दुष्ट