जाने क्या ज़माना-जमाना-ज़माना
कितना है सुहाना-सुहाना-सुहाना
तेरा प्यार मेरे लिए ऐ खुदा के बे-ऐब-बल्र्रे
जाने क्या ज़माना...
1.कांटो का ताज़ मेरा सर पर तेरे आ टिका
कीलों का पखरा मेरा हाथों पे तेरे ठुका
सारे जहान के पापों का फिदिया दिया
जाने क्या ज़माना...
2.आंसू मेरे सब पिये धरती के दुःख सह लिए
बंदा ये तेरा येशु जीयेगा तेरे लिए
नामे मसीहा का मैं ने सहारा लिया
जाने क्या जमाना...
3.करनी मोहब्बत सिखा मानिंद अपनी बना
दूर रहूं पाप से रूहानी कुरबत सिखा
बिगड़ी खुदाई के कामों का फिदिया दिया
जाने क्या जमाना...