जब जब गुनाह का सोचा, फिर याद तेरी आई | Jab Jab Gunaah Ka Socha Lyrics.

जब जब गुनाह का सोचा, फिर याद तेरी आई | Jab Jab Gunaah Ka Socha Phir yaad teri aayi Lyrics

जब जब गुनाह का सोचा

Ernest Mall

जब जब गुनाह का सोचा, फिर याद तेरी आई
और कलवरी की धारा, हृदय से यूं चिल्लाई
येशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं
येशु तेरे होते खता मैं कैसे करूं

1.कभी-कभी बगावत करता है मन
तुझसे भी सुंदर लगता है धन
सोने की चमक, पैसे की सदा
ताने दे कौन है तेरा खुदा
तब मैं घुटनों पर झुकता हूं
गालिब आकर यूं कहता हूं

येशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं.....

2.यह सच है पाप का ज़ोर है
तेरा इश्क ही इसका तोड़ है
लिपटू तुझ से बच्चे की तरह
हाथों में तेरे डोर है
तू मेरी खातिर पाप बना
ये सोचता हूं तो कहता हूं

येशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं...