मेरे मेहबूब प्यारे मसीहा..
मेरे मेहबूब प्यारे मसीहा
किस जगह तेरा जलवा नहीं है
किस जगह तेरी सोहरत नहीं है
किस जगह तेरी चर्चा नहीं है
आ….ओ….
1. लोग पीते है और गिर जाते हैं,
मैं तो पीता हूं गिरता नहीं हूं
मैं तो पीता हूं दर से मसीह के
यह अंगूरों का सिरा नहीं है …
2. मर गई थी वो याईर की बेटी
तूने उस पर निगाहें करम की
कर दिया जिन्दा उसको यह कहकर
यह तो सोती है मुर्दा नहीं है …
3. आंख वालों ने तुझको है देखा
कान वालों ने तुझको सुना है
उसको पहचानते है वह इन्सान
जिनकी आंखों में पर्दा नहीं है …
4. जिसमें शामिल नहीं इश्क तेरा
वो परस्तिश परस्तिश नहीं है
तेरे कदमों में होता नहीं जो
कोई वो सिजदा सिजदा नहीं है …
5. शान देखी फरिश्ते की हमने
देखी अजमत भी लेकिन हमने
जैसा रूतबा है तेरा मसीहों
ऐसा रूतबा किसी का नहीं है …
